PNB RSETI ऊना में अनुसूचित जाति की महिला कर्मचारी (कार्यालय सहायक) के साथ जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न, छुआछ (Code: HP-04-08-2026, Date: 01-Aug-2026 )

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Case Title

Case primary details

Case posted by NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh
Case code HP-04-08-2026
Case year 01-Aug-2026
Type of atrocity Abuses by caste name in any place within public view
Whether the case is being followed in the court or not? No

Fact Finding

Fact finding date

Fact finding date Not recorded

Case Incident

Case Incident details

Case incident date 01-Aug-2026
Place Village: Not recorded
Taluka:Not recorded
District: UNA(DP)
State: Himachal Pradesh
Police station UNA SADAR
Complaint date 02-Aug-2026
FIR date 02-Aug-2026

Case brief

Case summary

                         यह घटना जिला ऊना, के गाँव नंगल सलांगडी की दलित युवती की है, पीड़िता मीनाक्षी, पुत्री श्री जोगराज, आयु 26 वर्ष, जाति चमार, निवासी गांव व डाकघर नंगल सलांगड़ी, तहसील व जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश), जो कि पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (PNB RSETI) ऊना में नवंबर 2024 से कार्यालय सहायक (Office Assistant) के पद पर कार्यरत हैं और जिनका इस संस्थान के साथ पुराना प्रशिक्षण व कार्य का अनुभव रहा है, उनके साथ संस्थान में शामिल होने के समय से ही निदेशक सुधीर शर्मा, वरिष्ठ कार्यालय सहायक हीना डोगरा तथा फैकल्टी रजनी बाला द्वारा योजनाबद्ध तरीके से घोर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, शारीरिक हमले का प्रयास, अपमानजनक भाषा का प्रयोग तथा पदीय शक्तियों का दुराचार किया जाता रहा है, जिसमें मीनाक्षी के अनुसूचित जाति (चमार) से संबंध रखने के कारण उनके साथ संस्थान के भीतर छुआछूत जैसी अमानवीय प्रवृत्तियों का पालन करते हुए उनका पानी पीने का गिलास तक पूरी तरह से अलग रखा गया तथा कार्यालय परिसर में स्थापित संविधान निर्माता परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीर को भी दीवार से हटवा दिया गया ताकि पीड़िता को निरंतर उसकी जातिगत पृष्ठभूमि का एहसास कराकर नीचा दिखाया जा सके। संस्थान के निदेशक सुधीर शर्मा तथा हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को शासकीय वाहनों में यात्रा के दौरान तथा कार्यालय के दैनिक कार्यों में हर छोटी-बड़ी बात, प्रिंटआउट निकालने, पत्रावली संभालने और फॉलो-अप रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर बिना किसी कारण के रोका जाता, डांटा जाता तथा सार्वजनिक रूप से अपमानित करके उनका मानसिक शोषण किया जाता था, और जब भी मीनाक्षी अपने पदीय दायित्वों के तहत निष्पक्षता से कार्य करने का प्रयास करती थीं तो हीना डोगरा एवं रजनी बाला द्वारा उन्हें काम करने से रोका जाता था तथा एक अवसर पर हीना डोगरा द्वारा पीड़िता को थप्पड़ मारने तक का हिंसक प्रयास किया गया। दिनांक 10 अप्रैल 2025 तथा 11 अप्रैल 2025 को जब फैकल्टी रजनी बाला द्वारा प्रशिक्षणार्थियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं उपस्थिति रजिस्टर ताला-चाबी में छिपाकर रखे गए तथा फर्जी जन्मतिथि एवं अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों के नाम रजिस्टर में दर्ज कराने का अनुचित दबाव बनाया गया, तब मीनाक्षी द्वारा नियम सम्मत कार्य करने पर रजनी बाला एवं हीना डोगरा ने चिल्लाते हुए कहा कि "हमको डायरेक्टर ने बोल रखा है कि फर्जी DOB या न आने वाले कैंडिडेट को रजिस्टर कर दो, तू हमारा क्या बिगाड़ लेगी," और दिनांक 14 अप्रैल 2025 को जब मीनाक्षी ने कार्यालय सहायक के रूप में अपने दैनिक शासकीय कर्तव्य का पालन करते हुए उम्मीदवारों का उपस्थिति रजिस्टर मांगा ताकि एमआईएस (MIS) पोर्टल पर बोर्डिंग अपडेट की जा सके, तो रजनी बाला ने बिना किसी व्यक्तिगत कारण के विवाद शुरू कर दिया और उपस्थिति रजिस्टर देने से मना करते हुए "Go Away" कहकर चिल्लाने लगीं तथा हीना डोगरा के साथ मिलकर हाथापाई एवं थप्पड़ मारने पर उतारू हो गईं, जिसके उपरांत रजनी बाला ने आक्रामक होकर कार्यालय के कमरे में प्रवेश कर उपस्थिति रजिस्टर एवं प्रशिक्षणार्थियों के दस्तावेजों को फर्श पर फेंक दिया और पीड़िता को अपमानित करते हुए कहा कि "Put Them On Your Head"। इन गंभीर घटनाओं की लिखित शिकायत जब पीड़िता द्वारा निदेशक सुधीर शर्मा से की गई तो उन्होंने आरोपियों के विरुद्ध कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई करने के बजाय उल्टा आरोपी रजनी बाला व हीना डोगरा को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया तथा संस्थान में तानाशाही रवैया अपनाते हुए पीड़िता को चुप रहने या परिणाम भुगतने की धमकियां दीं, जबकि संस्थान के भीतर महिला प्रशिक्षणार्थियों एवं महिला ट्रेनरों (जैसे निर्मला देवी, मनिंदर कौर, राज रानी, कृतिका, करिश्मा, नीलम सूद, वंदना, अनीता राणा आदि) का भी निदेशक सुधीर शर्मा द्वारा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से ब्यूटी पार्लर एवं चेंजिंग रूम में निजता का उल्लंघन करके, अभद्र व द्विअर्थी शब्दावली का प्रयोग करके, पैसे रोकने तथा ब्लैकलिस्ट करने की धमकियां देकर व्यापक स्तर पर शोषण किया जा रहा था। इस निरंतर उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, शारीरिक व मानसिक यातना, तथा संस्थान के भीतर व्याप्त भय एवं असुरक्षा के वातावरण से व्यथित होकर पीड़िता मीनाक्षी द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों (मुख्य प्रबंधक एचआरडी हमीरपुर, एलडीएम ऊना तथा राष्ट्रीय नियंत्रक RUDSETI बेंगलुरु) को लिखित शिकायतें प्रेषित की गईं एवं दिनांक 2 अगस्त को संबंधित महिला थाना में आरोपियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई, ताकि इस गंभीर अपराध के दोषियों को दंडित कराया जा सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।

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