
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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| Case posted by | NCDHR- NDMJ, Himachal Pradesh |
| Case code | HP-29-07-2026 |
| Case year | 01-Jun-2026 |
| Type of atrocity | Dumps excreta, sewage, carcasses or any other obnoxious substance in premises |
| Whether the case is being followed in the court or not? | No |
| Fact finding date | Not recorded |
| Case incident date | 01-Jun-2026 |
| Place | Village: Not recorded Taluka:Not recorded District: UNA(DP) State: Himachal Pradesh |
| Police station | HAROLI |
| Complaint date | 01-Jan-1970 |
| FIR date | 01-Jan-1970 |
यह घटना हिमाचल प्रदेश की तहसील हरोली के गांव जोड़ियाँ पूबोवाल की है और यह गांव जिला मुख्यालय ऊना से लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कुलवंत सिंह स्पुत्र स्व: बाबा जीत सिंह, आयु 43 वर्ष, अनुसूचित जाति (चमार जाति) से सम्बन्धित निवासी गांव जोड़ियाँ पूबोवाल, तहसील हरोली, जिला ऊना (हि०प्र०) का स्थाई निवासी है तथा 12 वर्ष की अल्पआयु से ही परम पूजनीय बाबा जीत सिंह जी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत ऐतिहासिक 'डेरा बाबा जीत सिंह' (स्थान जोड़ियाँ पूबोवाल) की गुरुगद्दी पर आसीन होकर निष्ठापूर्वक धार्मिक दायित्वों, समाज सेवा व साध-संगत की सेवा संभाल रहा है तथा अपने व डेरे के जीवन-यापन हेतु डेरे से जुड़ी 105 कनाल भूमि पर खेती-बाड़ी व पशुपालन का कार्य करता है; इस पावन डेरे का मुख्य संपर्क मार्ग बालीवाल स्थित बालीवाल हाई स्कूल (मूलराज घंटी के स्कूल) के पास से होकर गुजरता है जो राजस्व विभाग के सरकारी कागजों व नक्शे में दर्ज स्वीकृत आम रास्ता है तथा सीमेंट/पक्के ब्लॉकों से बना हुआ है, परंतु ब्लॉक समाप्त होने वाले बिंदु से लेकर डेरे की सीमा तक जाने वाला लगभग 1 किलोमीटर का मार्ग अभी भी कच्चा है; घटना का सिलसिला तब शुरू हुआ जब स्थानीय स्टोन क्रेशर के संचालकों ने अपने निजी व व्यापारिक मुनाफे के लिए डेरे के आसपास तथा इस 1 किलोमीटर लंबे कच्चे मुख्य मार्ग के बिल्कुल पास भारी-भरकम जेसीबी व पोकलेन जैसी मशीनों से गैर-कानूनी व अंधाधुंध अवैध खुदाई शुरू कर दी, जिसके तहत क्रेशर के मुख्य मुंशियोमाडू (जाति जाट) ने भारी मशीनों का दुरुपयोग करके रास्ते के किनारों से जबरन मिट्टी उठवा ली और रास्ते के सुदृढ़ पक्के आधार व नींव को उखाड़ कर फेंक दिया, जिससे संपूर्ण मार्ग पर गहरे, खतरनाक व जानलेवा खड्डे बन गए. जब कुलवंत सिंह ने इस गैर-कानूनी कृत्य का विरोध किया और उक्त मुंशियों से शांतिपूर्वक बात करके रास्ते को न उखाड़ने व अवैध खुदाई रोकने का अनुरोध किया, तो मुंशियों ने पीड़ित की धार्मिक प्रतिष्ठा व अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि की अवहेलना करते हुए अत्यंत उग्र व आक्रामक होकर उनके साथ तीखी बहसबाज़ी की, गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार किया तथा उन्हें डरा-धमकाकर जबरन मिट्टी हटाने व रास्ते को नष्ट करने का कार्य जारी रखा, जो कि अनुसूचित जाति के एक धार्मिक स्थल के सेवादार पर किया गया सीधा मानसिक व सामाजिक अत्याचार (Atrocity) है. घटनाक्रम का सबसे दुखद व खौफनाक मोड़ तब आया जब क्रेशर वालों द्वारा रास्ते के समीप बनाए गए इन गहरे-गहरे खड्डों व कीचड़युक्त दलदल में पीड़ित की कई दुधारू व दूध देने वाली गायें अचानक गिर गईं और पानी व दलदल में डूबने के कारण उनकी असमय दर्दनाक मृत्यु हो गई, जिससे पीड़ित को भारी व्यक्तिगत, आर्थिक, मानसिक व धार्मिक आघात पहुँचा तथा उनकी आजीविका व पशुपालन का स्रोत पूरी तरह नष्ट हो गया; इसके उपरांत जब स्थानीय ग्रामीणों में इस तबाही को लेकर भारी आक्रोश पनपा, तो ग्रामीणों के उग्र विरोध के दबाव में आकर दिनांक 25 जून 2025 को क्रेशर संचालकों व उक्त तीनों मुंशियों ने जेसीबी लगाकर रास्ते की केवल नाममात्र ऊपर-ऊपर से मरम्मत करने का दिखावा किया, परंतु इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं और व्यापारिक लाभ के लिए दिन-रात मिट्टी हटाने व अवैध खुदाई का सिलसिला बदस्तूर जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान समय में रास्ता इस कदर उखड़ व तबाह हो चुका है कि वहाँ से वाहनों का गुजरना तो दूर, सामान्य मनुष्यों का पैदल चलना भी पूरी तरह दुश्वार व जानलेवा हो गया है; इस प्रकार क्रेशर संचालकों व उनके तीनों मुंशियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक रास्ते को उखाड़कर और दलदल में तब्दील करके डेरा बाबा जीत सिंह का संपर्क मार्ग पूरी तरह से काट दिया गया है, जिससे प्रतिदिन दूर-दराज के राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल से आने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं, वृद्धों, महिलाओं व बच्चों का आवागमन पूरी तरह बंद व ठप हो गया है, विशेषकर आगामी मानसूनी बरसात के दौरान पानी भर जाने से डेरा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा; यद्यपि पीड़ित द्वारा ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त सहमति-पत्र व फाइलें भी तैयार करवा ली गई हैं, परंतु आरोपियों की इस हठधर्मिता, जबरन मिट्टी उठाने, रास्ते को उखाड़ने, दलित गद्दीनशीन के साथ बहसबाज़ी व अत्याचार करने और गायों की मौतों से क्षेत्र में भारी जन-आक्रोश व्याप्त है; अतः इस संपूर्ण घटनाक्रम का निष्पक्ष विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से सार्वजनिक रास्ते की नाकेबंदी करके धार्मिक स्थल की आवाजाही को बंद किया गया है तथा पीड़ित के अधिकारों का हनन किया गया है, जिसके आलोक में ब्लॉक खत्म होने वाले बिंदु से डेरे तक के इस 1 किलोमीटर रास्ते को अविलंब पक्का करवाया जाना एवं दोषी मुंशियों व क्रेशर संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना अत्यंत न्यायसंगत, आवश्यक व न्यायहित में है।