
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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Shankar (19) belongs to dalit community, residing at Arivoli Nagar, 4th street, Muthur road, Vellakovil Taluk of Tiruppur District. He is studying degree in private collage. He was brutally attacked by Thangavelu and others because he fall in love with caste hindu jamuna on 22.10.2015.
यह घटना जिला ऊना की तहसील अम्ब की पचायत लडोली के गांव भर्वन उर्फ़ कंगरूही की है इस गांव में400 से भी अधिक दलित परिवारों की घनी बस्ती 350 साल से जिस भूमि पर मौजूद है उसके कागजात के खाना काश्त में वशिदंगान देह शब्द दर्ज है तथा खाना मालिक में गांव के नम्बरदार परिवार का नाम दर्ज है. ज़मीन के कागजात में काब्ज़ का नाम नहीं दर्शाया गया है खाना काश्त में वशिदंगान देह शब्द की एंट्री कई सालों से ऐसे ही चली आ रही है. कई बार पटवारी द्वारा गिरदावरियां हुई लेकिन एक सोची समझी साज़िश के तहत उन्होंने यह साबित ना किया की उक्त वशिदंगान देह रकवा पर किसकी आवादी है, किन परिवारों द्वारा उक्त भूमि का प्रयोग हो रहा है अर्थात काब्ज़ कौन हैं. इसी अधूरी एंट्री के कारण नम्बरदार परिवार ने उपरोक्त वशिदंगान देह रकवे को दलित परिवारों को डराते धमकाते हुए एक दुसरे परिवार को बेचना शुरू कर दिया है जिस कारण दलित परिवारों में आपसी तनाव पैदा हो गया है. कई दलित परिवार तो डर के मारे खुद की काब्ज़ ज़मीन जिन पर उनके मकान बने हुए हैं व खुद ही खरीद रहें है उन्हें डर है की कही उन्हें वेघर ना कर दिया जाए. इस गांव में गैर मौरूसी कब्जों के नाम का स्थानन्तरण तो हो गया है. परन्तु उपरोक्त खाना काश्त वशिदंगान देह रकवे का स्थानन्तरण काब्ज़दारों यानी दलित परिवारों के नाम नहीं हुआ है. वशिदंगान देह ज़मीन पर दलित परिवार लगभग 350 से भी अधिक वर्षों से वहां अपने घर बना कर रह रहे हैं. नम्बरदार परिवार द्वारा यह भी दर्शाया गया है की दलित आबादी में उनकी आबादी भी है पर ऐसा कुछ भी नहीं है. जिस वशिदंगान देह रकवे पर उनकी बस्ती है वह ज़मीन लगभग 500 से अधिक वर्ष पहले वहां के देवता बाबा साहली की माफीनामा जमीन है. जिसके बदले आज भी कई परिवार बाबा साहली के मंदिर में हर छ: महीने के बाद नई फसल में से अनाज वहा भेट किया करते हैं. दलित परिवारों का यह भी कहना है कि नम्बरदार परिवार 70-80 साल पहले पंजाब से आकर बसा है. और दोखे से खाना मालिक में नम्बरदार परिवार ने अपना नाम दर्ज करवाया है. दलित परिवारों का निवेदन है की उपरोक्त किसम की भूमि पर हुई रजिस्ट्रियों को रद्द करवा कर हकदार काब्जो के नाम भूमि सथान्तरण करवाई जाए. रणजीत सिंह, विमला देवी, करतारी देवी, वीरू राम, भागो देवी, राजकुमारी, बलबंत कुमार, रत्न चन्द, धनी राम, रवि कुमार राकेश कुमार, देव राज, व अन्य काफी सारे दलित परिवार इस घटना में पीडित हैं.
यह घटना जिला हमीरपुर की तहसील बडसर की पंचायत घोड़ी की है. यह गांव जिला मुख्यालय से 60 कि०मी० की दुरी पर है. इस गाव में पानी के लिए लोग ज्यादातर कुदरती तरीको पर निर्भर है. इस गांव में चमार जाति के 100 घर, जीर जाति के 2 घर, गिरथ जाति के 15 घर, राजपूत जाति के 100 घर हैं.
इस गांव में दलित समाज में से मनसा राम सपुत्र चेतु राम उम्र 63 वर्ष रहता है. वह चमार जाति से सम्बंधित है और मजदूरी का काम करता है व गांव में अपने भाई चारे के साथ मिलकर रह रहा है. इस गांव में दलित बस्ती के साथ लगभग 100 साल से भी अधिक पुराना कुआं है जिसको सन 2004 में पंचायत ने पक्का करवाया. गर्मियों में सरकारी नलों में पानी की कमी के कारण दलित बस्ती के लोग इसी कुँए से हर साल पानी भरते हैं. इसी के साथ दलित बस्ती के लोगों द्वारा कुँए की सफाई भी की जाती रही है. यह कुआं दलित बस्ती से 60-70 मीटर की दुरी पर है पंचायत ने इस कुँए की जाने के लिए रास्ते को भी पक्का करवाया. घटना 17/06/15 की जब मनसा राम ने हर साल की तरह कुआ साफ़ करने का फैसला लिया. मनसा राम ने सुबह सुबह जाके कुआ साफ़ करने के लिये सीता राम के घर से टुल्लू पम्प लाया व कुआ साफ़ करने के लिए बस्ती के ही नेगी, सुख राम, विशन दास, कमल कुमार को साथ लिया. जब व कुआं साफ़ करने के लिए कुँए पर पहुंचे तो उन्होंने देखा की कुँए में अमर सिंह सपुत्र मंगत राम जाति राजपूत ने इस कुए में सड़ी गल्ली सब्जियां फेंक रखी है क्योंकि कुए के साथ उसकी ज़मींन है और उस ज़मींन में उसने सब्जियां लगा रखी हैं. इस मोके को देखते हुए मनसा राम व अन्य बस्ती वालों ने मोके पर गांव के उपप्रधान कश्मीरी लाल जाति ब्राह्मण को बुलाया व कुआँ साफ़ करने से पहले मोका देखने को कहा. मनसा राम व अन्य दलित बस्ती के लोग जो कुआं साफ़ करने के लिए आये हुए थे उपप्रधान को मौका दिखा ही रहे थे की इतने में अमर सिंह सपुत्र मंगत राम जाति राजपूत ने वहां अपने बेटों चमन व पवन के साथ आकर गालिया निकालनी शरू कर दी की किस साले ने उपप्रधान को बुलाया है इस कुँए की कोई सफाई नहीं होगी यह कुआ मेरी ज़मींन में है और मैं किसी को भी पानी नहीं भरने दूंगा जब सभी ने इस बात का विरोध किया तो अपर सिंह हाथापाई करने पर उतारू हो गया जिस पर उपप्रधान ने मौका से सभी को घर चलने को कहा. सभी लोग जब दलित बस्ती की और अपने घरो को जाने लगे तो कुँए के पास मनसा राम व कमल कुमार रह गए व घर की और जाने लगे तो अमर सिंह अपने बेटों से कहने लगा की चलो चलो घर चलो जे चमार चोदर तो ऐसे ही रहेगी. इसके बाद मनसा राम व अन्य दलित बस्ती के लोगो मिलकर SDM हमीरपुर को इस घटना बारे शिकायत दर्ज करवाई. SDM ने DSP को इस केस की कार्य वाही करने को कहा व अमर सिंह के खिलाफ पर्चा दर्ज करवाया.
यह घटना जिला हमीरपुर की तहसील भोरंज की पंचायत कडोता में पड़ते गांव कठियान्वी की है. यह गांव जिला मुख्यालय से चालीस कि०मी० की दुरी पर है. इस गांव में आगनवाडी स्कुल व दसवी कक्षा तक स्कुल है व एक सरकारी स्वस्थ्य उपकेन्द्र भी है. इस गाव में पानी के लिए लोग ज्यादातर कुदरती तरीको पर निर्भर है. इस गांव में चमार जाति के 80 घर, कबीर पंथी जाति के 30 घर, ब्राहमण जाति के 25 घर, गिरथ जाति के 25 घर, राजपूत जाति के 4 घर हैं.
इस गांव में दलित समाज में से प्रशोतम चन्द सपुत्र धनी राम उम्र 41 वर्ष रहता है. वह चमार जाति से सम्बंधित है. वह सरकारी ठेकेदारी का काम करता है. मुख्य मार्ग से कठियाम्वी होते हुए नाले तक कुल 800 मी० कच्ची सड़क है. जिस पर पंचायत द्वारा PWD में माध्याम् से पक्की सड़क बनाने का निरन्य लिया गया. इस सड़क के लिए कुल 33 लाख रूपये खर्च करने का निर्णय लिया गया. PWD महकमा ने सड़क के शुरुयाती काम के लिये प्रशोतम चन्द सपुत्र धनी राम जो की सरकारी ठेकेदार है को काम दे दिया. 22 मार्च 15 को सड़क का काम शुरू करा दिया गया. लेकिन 17 अप्रैल 15 को PWD विभाग द्वारा सड़क का काम किया जा रहा था की कडोहता गांव के राजीव कुमार सपुत्र जगदीश चन्द जाति राजपूत, वरिन्द्र कुमार सपुत्र जगदीश चन्द जाति राजपूत, दुनी चन्द सपुत्र जय सिंह जाति राजपूत, ज्ञान चन्द मुरली जाति राजपूत ने सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया व जाति सूचक गालिया निकालने लगे. इन सभी ने सड़क निर्माण की सोलिंग भी उखाड़ डाली व मजदूरों के साथ हाथापाई भी की गई. इन सभी लोगों ने PWD विभाग पर अपना दबाब वनाया व सड़क कार्य को बंद करवा दिया. इसके बाद 18/04/15 को दलितों ने मिल कर एक ज्ञापन जिलाधिश महोदया को दिया जिस पर जिलाधिश महोदय ने SDM भोरंज को मोका पर जाने को कहा और सडक के लिए ज़मीन की पटवारी तहसीलदार द्वारा निशाँन देहि करवाने को कहा. 21 अप्रैल को सभी राजपूतों ने मिल कर निशाँन देहि करवाई. लेकिन अभी तक सड़क का कार्य रुका हुया है और राजपूतो द्वारा अपनी अपनी ज़मींन की कोर्ट से स्टे लेकर PWD विभाग पर पूरी तरह से दबाव बना कर कार्य को रोक दिया है व् प्रशोतम चन्द सपुत्र धनी राम जो की सरकारी ठेकेदार है को काम दे दिया था पर झूठा केस डाल दिया है की इसका मकान सड़क निर्माण कार्य के बिच है व इसने सड़क निर्माण के दोरान हमारे निजी पेड़ काटे व हमारी गेहूं की फसल खराब करी. अब मोजुदा सिथिति में PWD विभाग द्वारा सड़क पूरी तरह से JCB से उखाड़ दी गई है जिस कारण सम्पर्क सड़क मार्ग पूरी तरह से बाधित हो चुका है तथा आम जन /स्कूली बच्चों को आने जाने/ बीमार व्यक्तियों को लाने ले जाने में भारी परेशानी हो रही है.
यह घटना जिला बिलासपुर की तहसील नैना देवी में पड़ते गांव तरसुह की है. यह गांव भाखड़ा डैम से 6 कि०मि० की दुरी पर स्थित है.इसी गांव के दलित जाति में से चमार जाति से सम्बधित सतनाम सिंह सपुत्र श्री तरसेम लाल रहता है. जिसकी उम्र 36 वर्ष की है. सतनाम सिंह के पास खुद का ट्रैक्टर है और वह भाड़े का काम कर अपना जीवन गुज़र वसर कर रहा है. सतनाम सिंह हर रोज की तरह 07/05/15 को गांव खड समतैहन की सुखी नदी से रेत लाने ट्रैक्टर लेकर गया व ट्रैक्टर में रेत भरने लगा. सतनाम सिंह नदी से रेत भरने के पैसे वह के ठेकेदार को दिया करता था. जब व रेत अपने ट्रैक्टर में भर रहा था तो वहां पर गांव खड समतैहन राजपूत जाति से जय सिंह जिसकी उम्र 38 वर्ष है जो की इसी गांव के स्कुल में अध्यापक है आया और सतनाम सिंह को गालिया निकालने लगा की साले कुत्ते नदी से रेत भर भर के नदी में बड़े बड़े खढे कर दिए है और तुम अवैध खनन कर रहे हो सतनाम सिंह ने बताया की वह रेत भरने के ठेकेदार को पैसे देता है और इस नदी का ठेका सरकारी है वह कोई अवैध खनन नहीं कर रहा है लेकी जय सिंह सतनाम सिंह को गालिया निकालने लगा जब सतनाम सिंह ने इसका विरोध किया तो जय सिंह ने कहा की तू चमार को जानता हूँ की तू कितने पानी में है. इतने में जय सिंह ने सतनाम सिंह के साथ हाथापाई शुरू कर दी पर वहां मोजूद कुलदीप शर्मा ने दोनों को छुडाया कुलदीप शर्मा भी अपने ट्रैक्टर में रेत भरने के लिए आया हुया था. इस पर सतनाम सिंह ने तुरंत वहां की पंचायत को वताया व एक लिखित शिकायत पुलिस चौकी ग्वालथाई में दी. दिनाक 09/05/15 को सभी को पंचायत सहित पुलिस चौकी ग्वालथाई में बुलाया. जय सिंह व उसके परिवार ने सभी के सामने अपनी गल्ती सवीकार करके माफ़ी मागना शुरू कर दिया जिस पर पंचायत ने सतनाम सिंह को उन्हें माफ़ कर देने को कहा इसके बाद जय सिंह से लिखित रूप में माफीनामा लिया गया. और इस केस को वही ख़त्म किया गया.