
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
Type ATM < your message > Send to 9773904050
]
यह घटना जिला ऊना की तहसील हरोली के गांव बाथडी की है इस गांव में दलित समाज से सुमन देवी पत्नी अशोक कुमार है. जिसकी उम्र 32 वर्ष की है. वहअनुसूचित जाति में से लोहार जाति से सम्बंधित है. उसके दो बच्चे हैं एक बेटा और बेटी, बेटी पांचवीं कक्षा में पढ़ रही है. और बेटा नर्सरी में पढ़ रहा है. वह अपने गांव के बार्ड न० 2 से बार्ड पंच है और अपने गांव के मुख्य बाज़ार में ब्यूटी पार्लर की दूकान भी करती है और उसका पति भी उसके साथ वाली दूकान में अपनी खुद की फर्नीचर की दूकान करता है. सुमन को यह दूकान करते हुए करीब दस वर्ष हो गए है. सुमन के गांव का पूरा पता :- गांव व डाकघर बाथडी, तह० हरोली, जिला ऊना हि०प्र० है
दिनाक 20 अक्तूबर 2024 को सुबह करीब 6:30 पर संदला देवी उर्फ़ संजू पत्नी गुरमीत सिंह जाति तरखान (obc) निवासी बाथडी सुमन के घर पर अपनी बहन तोषी पत्नी जीत राम के साथ आई सुमन को लगा कि आज करवाचौथ का व्रत है शायद कुछ ब्यूटी पार्लर का काम करवाने आई है लेकिन उसने आते ही सुमन के पति व सास को बुलाया और उसके पति से बोली तुम लोग बाथू दरगाह पर जाना बंद करो क्योंकि दरगाह के फ़कीर ने उसके बेटे ने और तुम सब ने हमारी लड़की के भाग कर शादी करने की बदनामी करी है जबकि ऐसा कुछ भी ना है. क्योंकि संदला देवी व उसका पूरा परिवार खुद दरगाह के सेवादार रह चुक्के है और संदला देवी की एक बेटी उसका नाम कंचन है. कंचन ने अपने परिवार की इच्छा के विरुध गुरपलाह के रमन सैनी स्पुत्र स्व: कश्मीर सिंह से जबरन शादी कर ली है शादी करने से पहले कंचन को उसके पिता गुरमीत सिंह ने काफी समझाया की व वहाँ शादी ना करे लड़का उनकी मर्जी का ना है इसी के चलते संदला व इसका पति गुरमीत सिंह धार्मिक आस्था के चलते कंचन को दरगाह में लेकर गए वहाँ पर दरगाह के गद्दी नशींन होने कारण फ़कीर रूप लाल ने उनके बेटे लखवीर लाल ने कंचन को काफी समझाया पर कंचन ने किसी की भी ना सुनी और अपने परिवार के विरुध जाकर रमन सैनी से ही 23 फरवरी 2024 को भाग कर शादी कर ली जिसके चलते कंचन को उसके परिवार ने वेदखल कर दिया और अपनी जिंदगी में खुश रहने को बोल दिया था. जब संदला देवी बार बार सुमन व उसके परिवार वालो को दरगाह पर जाने को मना करने लगी तो सुमन के पति ने कहा हम वहां जाना नहीं छोड़ सकते वो हमारे गुरु हैं. फिर संदला ने सुमन के पति से कहा तुझे पता है तेरी पत्नी की सेटिंग किधर चल रही है तेरी पत्नी राणा मेडिकल स्टोर वाले के साथ सेट है और उसके साथ ही फसी हुई है. इतनी बात सुनते ही सुमन के पति व सास को काफी गुस्सा आया उसके पति ने कहा कि आप ऐसे कैसे बोल सकती है मेरी पत्नी मौजूदा बार्ड पंच हैं, पिछले दस वर्ष से अपनी ब्यूटी पार्लर की दूकान चला रही है और पिछले कुछ वर्षों से साथ में ही मैं अपनी फर्नीचर की दूकान कर रहा हूँ लेकिन आज दिन तक किसी से भी मैंने अपनी पत्नी बारे ऐसा नहीं सूना इतने में संदला उर्फ़ संजू सुमन व उसके सब परिवार को माँ बहन कि गालियाँ निकालने लगी इतने में संदला का पति गुरमीत सिंह उर्फ़ मीता भी उनके घर आ गया और वो भी काफी बुरा भला बोलने लगा और गालियाँ निकालने लगा. संदला देवी बड़े ही अपमानित तरीके से बोली “तुसी बस ओही जात दे लोहार ही रैना सालेयो” तभी सुमन के घर के गेट पर दर्शन सिंह स्पुत्र मंगत राम जो कि सुमन के घर से थोड़ी दुरी पर ही रहता है आया और किसी काम से आवाज देने लगा फिर संदला देवी अपनी बहन व पति के साथ दर्शन के सामने से ही गन्दी गन्दी गलियाँ निकालती हुई व जान मरवाने की धमकी देते हुए और जातिय तोर पर प्रताड़ित करती हुई अपने घर को चली गई संदला का घर सुमन के घर से करीब 500 मीटर कि दूरी पर है. इस बारे जब सुमन व उसके पति ने राणा मेडिकल स्टोर वाले से बात करी गई तो उसने भी कहा की संदला झूठी अफ़वाह फैला रही है जिससे उसकी भी इज्ज़त काफी प्रभावित हुई है और वह खुद संदला देवी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करवाने को तेयार है. इतना ही नहीं संदला कि बहन तोषी का पति जीत राम भी सुमन व उसके पति की दुकानों के साथ ही अपनी फर्नीचर की दूकान करता है और हर आये दिन प्रताड़ित करने वाली बातें सुनाता रहता है और सुमन के पति बारे बोलता है कि इसका बाप तो मर गया अब यह आ गया है हमारा धंधा चोपट करने के लिए.
सुमन देवी ने जिला ऊना के ASP सुरिंदर शर्मा के पास संदला देवी उर्फ़ संजू उसका पति गुरमीत सिंह व संदला कि बहन तोषी और उसका पति जीत राम ने जो पुरे गांव भर में सुमन कि झूठी बदनामी करी है और इज्जत उछाली है और जातिय तोर पर प्रताड़ित किया है व जान से मरवाने कि धमकी दी है के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई व दोषीगण खिलाफ शीग्र अति शीग्र आनुसुचित जाति जनजाति अधिनियम एक्ट व BNS कि उचित धारायों सहित कानूनी कार्यवाही अमल में लाते हुए मामला दर्ज किया जाए बारे प्रार्थना करी. जिस पर थाना टाहलीवाल में उचित धारायों के तहत मामला दर्ज किया गया.
यह घटना जिला ऊना की तहसील बंगाणा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पनसाई (डाकघर बुदान) की है, जहाँ दलित समुदाय से संबंध रखने वाले 39 वर्षीय नरेश कुमार पुत्र श्री परस राम, जो पेशे से एक साधारण मजदूर हैं और चमार जाति से आते हैं, अपने परिवार के साथ निवास करते हैं। घटनाक्रम के अनुसार, दिनांक 9 अप्रैल 2026 की रात्रि करीब 09:50 से 10:0 0 बजे के बीच जब नरेश कुमार अपनी गाड़ी को गांव में ही सरकारी जमीन पर बने रैन बसेरा के पास पार्क करने के लिए ले गए, तो वहाँ पहले से ही प्रवीण कुमार पुत्र सुखदेव सिंह, होशियार सिंह पुत्र सुखदेव सिंह, और अभिषेक पुत्र वलवीर सिंह (सभी जाति राजपूत) मौजूद थे, जो वहां बैठकर शराब पी रहे थे। जैसे ही नरेश कुमार ने अपनी गाड़ी वहां खड़ी करने की कोशिश की, इन व्यक्तियों ने बिना किसी ठोस कारण के आपत्ति जताई और गाड़ी पार्किंग को लेकर गाली-गलौज व बहसबाजी शुरू कर दी। विवाद बढ़ता देख जब नरेश कुमार ने प्रवीण कुमार को गाड़ी से बाहर निकल कर घर भेजने का प्रयास किया, तो आरोपी प्रवीण कुमार और उसके साथियों ने उग्र होकर नरेश कुमार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। शोर-शराबा सुनकर घटनास्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित घर से नरेश कुमार की पत्नी कमलेश कुमारी, उनके भाई रविंदर कुमार और भाभी सुरेखा देवी तुरंत मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने की कोशिश की। इसके बावजूद, आरोपियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने लोहे की रॉड, डंडों व अन्य हथियारों से पूरे परिवार पर हमला बोल दिया। इस हिंसक हमले के दौरान होशियार सिंह की पत्नी पूजा और उसकी बेटी मुस्कान व् प्रवीन का बेटा पियूष आदि अन्य आरोपियों के साथ शामिल हो गये और सभी ने मिलकर पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियां देते हुए अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। हमले की विभीषिका इतनी अधिक थी कि लोहे की रॉड से वार किए जाने के कारण नरेश कुमार की पत्नी कमलेश कुमारी का सिर बुरी तरह फट गया, जिसमें बाद में अस्पताल में करीब 6 टांके लगाने पड़े। नरेश कुमार ने करीब 9 महीने पहले अपने पेट में हर्नियों का ओप्रेशन करवाया और उसके पेट में जाली पड़ी है जो की मारपीट के दोरान हिल गई है जिस कारण उसके पेट में बुरी तरह से दर्द हो रहा है. मारपीट के इसी हंगामे के बीच नरेश कुमार की जेब से ₹20,000 की नगद राशि भी कहीं गिर गई या छीन ली गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CH) बंगाणा पहुँचाया, जहाँ चिकित्सा अधिकारियों ने नरेश कुमार और कमलेश कुमारी की MLC (मेडिकल लीगल केस) रिपोर्ट तैयार की। इस गंभीर मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस थाना बंगाणा में दिनांक 10 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 191, 190 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति निवारण अधिनियम 2018 की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) के तहत एफआईआर नंबर 0033 दर्ज की गई, जिसकी जांच अब राजपत्रित अधिकारी (DSP स्तर) द्वारा अमल में लाई जा रही है।
हमीरपुर जिले की भोरंज तहसील के अंतर्गत ग्राम बल्ह बुलेट डाकघर टाउन भरारी में दलित समुदाय के प्रति सामाजिक अन्याय और सरकारी संसाधनों के पक्षपातपूर्ण उपयोग का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। इस पूरे संघर्ष के केंद्र में राजेंद्र कुमार हैं, जो 57 वर्षीय मजदूर हैं और स्वर्गीय श्री फितू राम के पुत्र हैं। राजेंद्र कुमार और उनके साथ गाँव के चमार जाति के कुल 10 परिवार पिछले कई वर्षों से बुनियादी मानवाधिकार 'सड़क' के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अनुसूचित जाति विकास योजना (SCDP) के तहत इस बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 87 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया। 7 जुलाई 2021 को तत्कालीन विधायक कमलेश कुमारी द्वारा बड़ी उम्मीदों के साथ इस सड़क का भूमि पूजन किया गया था, ताकि दलित समुदाय के इन 10 परिवारों का जीवन सुगम हो सके।
सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय ग्राम सुधार सभा और दलित समुदाय के लोगों ने स्वयं पहल की थी। इन परिवारों ने चंदा इकट्ठा किया और अपनी सीमित जमापूँजी खर्च करके भोटा-लदरौर हाईवे से गाँव तक कच्ची सड़क का निर्माण किया। इस नेक कार्य के लिए दलित परिवारों ने बड़े त्याग किए; सड़क का रास्ता निकालने के लिए कई परिवारों को अपने पुराने मकानों के हिस्सों और दीवारों को तोड़ना पड़ा। इतना ही नहीं, जो पक्का पैदल रास्ता (खंड़जा) पहले पंचायत द्वारा बनाया गया था और जिससे लोग आते-जाते थे, विभाग ने नई सड़क बनाने के नाम पर उस सुरक्षित रास्ते को भी उखाड़ दिया। ग्रामीणों ने इस उम्मीद में यह सब सहा कि जल्द ही उनके घर तक एम्बुलेंस और गाड़ियाँ पहुँच सकेंगी।
परंतु, जैसे ही लोक निर्माण विभाग ने कार्य शुरू किया, प्रशासनिक और सामाजिक भेदभाव की दीवारें खड़ी हो गईं। विभाग ने स्वीकृत 40 लाख में से 30 लाख रुपये की मोटी राशि खर्च कर दी, लेकिन यह सड़क केवल सामान्य वर्ग (ब्राह्मण समुदाय) की बस्ती और उनके घरों तक ही बनाई गई। जैसे ही सड़क का निर्माण दलित परिवारों के 10 घरों की ओर बढ़ने लगा, निजी भूमि का विवाद खड़ा कर दिया गया। आरोप है कि प्रभावशाली वर्ग ने अपने हिस्से की सड़क तो बनवा ली, लेकिन दलितों के घरों तक जाने वाले रास्ते पर अड़ंगा लगा दिया। विभाग के अधिकारियों, जिनमें एसडीएम भोरंज शशिपाल शर्मा और अधिशाषी अभियंता केके भारद्वाज शामिल हैं, ने मौके का निरीक्षण तो किया, लेकिन कोई ठोस समाधान निकालने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
आज स्थिति यह है कि पुराना पक्का रास्ता उखाड़े जाने और नई सड़क अधूरी रहने के कारण यहाँ का धरातल पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है। बरसात के मौसम में इन 10 परिवारों का जीना दूभर हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के कारण पैदल चलना भी जानलेवा हो गया है। सबसे दुखद स्थिति तब होती है जब कोई बुजुर्ग, गर्भवती महिला या बच्चा बीमार पड़ता है। गाँव में सड़क न होने के कारण मरीजों को आज भी चारपाई पर लिटाकर और कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। 21वीं सदी में इस तरह की अमानवीय स्थिति सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता और जातिगत भेदभाव को दर्शाती है।
वर्तमान में, राजेंद्र कुमार और अन्य पीड़ित परिवारों का सब्र का बाँध टूट चुका है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके घरों तक सड़क का निर्माण तुरंत पूरा नहीं किया गया, तो वे उस सड़क को भी बंद कर देंगे जो उनकी निजी भूमि से होकर गुजरती है और जिसे उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सौंपा था। यह मामला न केवल सरकारी धन (30 लाख रुपये) के दुरुपयोग का है, बल्कि एक विशिष्ट समुदाय को जानबूझकर विकास की मुख्यधारा से वंचित रखने का एक गंभीर मामला है।
यह घटना तहसील धर्मशाला के गांव रसां तपोवन की है। इस गांव में पल्लवी केस का घटनाक्रम एक अत्यंत दुखद और जटिल कानूनी मामला है, जो शिक्षण संस्थानों में रैगिंग, यौन उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलता के गंभीर पहलुओं को उजागर करता है। इस पूरी त्रासदी की शुरुआत 18 सितंबर 2025 को धर्मशाला सरकारी डिग्री कॉलेज के परिसर में हुई, जहाँ बीए प्रथम वर्ष की छात्रा पल्लवी के साथ उसकी तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—द्वारा कथित तौर पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना (रैगिंग) की गई। इस घटना ने पल्लवी को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया, लेकिन मामला तब और भी गंभीर हो गया जब पल्लवी ने अपनी मृत्यु से पूर्व साझा किए गए बयानों और वीडियो में कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर यौन उत्पीड़न और अनुचित स्पर्श (बैड टच) के आरोप लगाए। पल्लवी के अनुसार, जब उसने रैगिंग की शिकायत करने का प्रयास किया, तो उसे न्याय दिलाने के बजाय प्रोफेसर द्वारा प्रताड़ित किया गया, जिससे वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) और ट्रॉमा में चली गई। अगले तीन महीनों तक पल्लवी की स्थिति लगातार बिगड़ती रही; उसे पहले धर्मशाला के जोनल अस्पताल और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अंततः, 26 दिसंबर 2025 को लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में उसने अंतिम सांस ली। पल्लवी की मृत्यु के बाद जन आक्रोश भड़क उठा और धर्मशाला सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में "जस्टिस फॉर पल्लवी" की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस ने प्रोफेसर और तीनों छात्राओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और हिमाचल प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले में हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने भी हस्तक्षेप किया, क्योंकि पल्लवी एक दलित परिवार से थी और आरोपों में जातिगत भेदभाव के संकेत भी मिले थे। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है. पल्लवी के दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है. पुलिस का रवैया पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और संवेदनहीन है। वे दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और पीड़ित परिवार पर ही दबाव बना रहे हैं।
यह घटना तहसील बंगाणा के गांव बसातर की है। इस गांव में दिनाक 29 दिसम्बर को तहसील बंगाणा में पड़ते गांव बसातर में कबीर पंथी समाज में से वीरबल सिंह की मौत हो गई जिसकी उम्र करीब 71 वर्ष की थी. गांव बसातर में सरकारी ज़मीन पर सरकार द्वारा सार्वजनिक तौर पर एक शमशान घाट बनाया गया है. लेकिन वीरबल सिंह के शव को शमशान घाट पर ले जाने से पहले ही लकड़ियों की चिता को शमशान घाट के बाहर ही बना दिया गया जब कुछ लोगो द्वारा चिता को शमशान घाट के अन्दर बनी शैड में लगाने को कहा गया तो अपशगुन का बहाना लगा कर चिता को बाहर ही लगाया गया और शव को बाहर ही जला दिया गया इससे पहले भी दलित परिवार से प्रकाश चन्द के शव को बरसात में शमशान घाट के बाहर ही जलाया गया जबकि गैर दलित समाज के शवों को शमशान घाट के शैड में ही जलाया जाता है. गांव बसातर का यह शमशान घाट सार्वजनिक तौर पर है और सरकार की ज़मीन पर सरकारी पैसे से बना हुआ है। शासन प्रसाशन इस घटना पर कडा संज्ञान ले. इतना ही नहीं पंचायत द्वारा पीड़ित परिवार की ज़मीन बिना किसी अनुमति जबरन रोड बना दिया है और रोड का सारा पानी पीड़ित के मकान के पीछे छोड़ दिया गया है जिस कारण पीड़ित का सारा मकान बैठ गया है.