
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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यह घटना जिला ऊना, तहसील हरोली, गाँव डीटां की है, जहाँ दलित समाज से सम्बन्धित दलजीत कौर पत्नी श्री रोशन लाल रहती हैं।जिसकी उम्र 24 वर्ष की है. वह अनुसूचित जाति में से चमार जाति से सम्बंधित हैं.वह शादी शुदा है.उसकी एक नवजात बेटी है जो कि मात्र अभी 16 दिन की हुई है. उसका पति पेंटर का काम करता है. वह लोगों के घरो को रंग करने का काम करता है. उसकी शादी को करीब 3 वर्ष हो गये हैं. उसके घर में उसकी सास व ससुर उनके साथ ही रहते है व घर के ऊपर बने टीन पोश मकान में उसका देवर व देवरानी रहते है.
दलजीत कौर के देवर ने अपनी मर्जी से गांव वोलेवाल त० हरोली जिला ऊना की मुस्लिम लड़की से प्रेम विवाह किया है और उनकी एक 3 वर्ष की बेटी भी है. दलजीत कौर की देवरानी का नाम शहनाज है. करीब एक महीना पहले किसी बात को लेकर उसकी देवरानी की उसके देवर के साथ कहा सुनी हुई जिसके बाद दलजीत की देवरानी घर छोड़ कही चली गई जिसका दलजीत व उसके पुरे परिवार को नहीं पता की उसकी देवरानी शहनाज कहा पर जाकर रह रही है. जिसकी गुमशुदगी की शिकायत दलजीत कौर के देवर ने 1100 नंबर पर भी करी है.
दलजीत कौर की देवरानी शहनाज की एक सहेली है जिसका नाम मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू स्पुत्री बग्गा, जाति जट, निवासी गांव व डाo हीरां, तहo हरोली जिला ऊना हि०प्र० है. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू का घर दलजीत कौर के घर से करीब 100 मीटर की दुरी पर ही है. जिस कारण अक्सर मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू का उसकी देवरानी शहनाज़ के पास आना जाना लगा रहता था. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू उसी वक्त उसकी देवरानी शहनाज के पास आती जाती थी जब दलजीत कौर का देवर घर पर नहीं होता था. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू दलजीत कौर की देवरानी को अक्सर अपनी स्कूटी पर घुमाने ले जाती थी. पूरा दिन घूम फिर कर मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू व दलजीत की देवरानी शहनाज़ शाम को घर वापिस आती थी. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू को अपने घर से लालुवाल मुख्य सडक तक आने जाने के लिए दलजीत कौर के घर के पीछे वाली सड़क से ही रास्ता है और वहीँ से आना जाना है.
दिनाक 12/09/25 को करीब शाम 5 बजे जब दलजीत कौर अपनी नवजात बेटी की नैपी फेकने बाहर आई तो उसने देखा कि मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू अपनी मम्मी (नाम भोली) के साथ पैदल जा रही थी तो दलजीत कौर ने उसे आवाज लगा कर रोक लिया और पूछा कि काज्जू मेरी देवरानी का कुछ पता है कि किधर है उसको करीब एक महीना हो गया है घर से गए हुए. इतने में दलजीत कौर की सास भी घर से बाहर आ गई. तब मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू ने सड़क से ही बोलना शुरू कर दिया कि मुझे नहीं पता कहा है शहनाज. दलजीत कौर ने कहा कि काज्जू व अकसर तेरे साथ ही घुमने आती जाती थी और तेरी ही सहेली है. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू दलजीत कौर पर आग बबूला हो गई और उसे बोली “चल कुत्ती चगल किसे थां दी” मुझ से सवाल जबाव ना कर मुझे नहीं पता शहनाज कहाँ है. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू बोली “सालेयो चमारो अस्सी जट हुँदे अस्सी जट्टीयाँ ही ब्याह के लियानियाँ तोडे चमारा मांग मुसलमाननियाँ नी लैके आनियाँ” दलजीत कौर की सास को मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू की मम्मी ने धक्का मारा और गालियाँ देते हुए बोली चल कुत्ती साली कहीं की तुहाडी चमारडी कदे आइये ना. मनप्रीत कौर उर्फ़ काज्जू ने दलजीत व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी और कहा की तुम सब की गेम ओवर करवाना मेरे बाए हाथ का काम है. उसके बाद दोनों गाली गलोच करती हुई पैदल अपने घर को चली गई.
जैसे ही दलजीत कौर का पति घर आया तो दलजीत कौर उसी शाम दिनाक 12/09/25 को शाम करीब 5:30 अपनी 9 दिन की नवजात बच्ची को साथ लेकर थाना हरोली में गई और अपनी शिकायत वहां पर बताई पर वहां पर उसकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया. उसे कहा गया कि अपने साथ चार गवाह उच्च जाति के लेकर आओ तभी मामला दर्ज होगा नहीं तो मामला दर्ज नहीं होगा. वह वहां से वापिस अपने घर आ गई. उसके बाद हवा लगने कारण दलजीत कौर और उसकी बेटी बहुत बीमार हो गई और घर पर ही रही. इसके बाद उसनेजिला ऊना में ASP श्री सुरेंद्र शर्मा को NDMJ – NCDHR टीम के साथ दिनाक 22-09-25 को शिकायत पत्र प्रस्तुत किया और दोषी के विरुद्ध SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज करवाया।
यह घटना जिला हमीरपुर की तहसील बड़सर के गांव ननावां की है। इस गांव में लगभग 51 वर्षीय व्यक्ति प्यारस्पुत्र स्व।रत्न चंद, निवास करता हैं। प्यार चन्द मजदूरी का काम करता है। प्यार चन्द तीन भाई है एक भाई दूकान करता है और एक फौज से सेवानिर्वित है।
प्यार चन्द की माता जिसका नाम अमरो देवी उम्र 76 वर्ष की थी। अमरो देवी कैंसर की बिमारी से पीड़ित थी उसका इलाज़ हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर के एम्स अस्पताल में चल रहा था। दिनाक 29/08/25 को सुबह 8 बजे प्यार चन्द की माता अमरो देवी की एम्स अस्पताल में मृत्यु हो गई। प्यार चन्द व उसका परिवार अमरो देवी का मृत शरीर लेकर करीब 10 बजे अपने गांव निवास स्थान ननावां में लेकर आ गए। उस दिन लगातार भारी बारिश हो रही थी।
ननावां गांव में दलित समाज के करीब 40 घर है और इनको शव जलाने के लिए खड्ड (बरसात का नाला) में लेकर जाना पड़ता है। उस दिन भारी बारिश के चलते खड्ड में काफी पानी आया हुआ था और वहां पर शव जलाना मुमकिन नहीं था इसलिए प्यार चन्द के चचेरे भाइयों व अन्य सभी ने ननावां के ग्राम पंचायत के प्रधान से कहा की आप खड्ड के बिलकुल साथ लगते गांव भेवड के प्रधान से बात करो की बारिश के कारण हम अमरो देवी का संस्कार आपके शमशान घाट में करना चाहते हैं क्योंकि व शमशान घाट खड्ड के साथ ही है और सरकारी ज़मीन पर बना है व वहा पर शव जलाने के लिए शैड भी बनी हुई है।
जब ननावां गांव के प्रधान ने भेवड गांव के प्रधान से बात करी तो उन्होंने ने साफ़ मना कर दिया की गांव वासी शमशान घाट में शव जलाने को मना कर रहे है क्योंकि व सारा गांव जाटों व राजपूतों का है। प्यार चन्द व उसका परिवार और सभी साग सम्बन्धी भरी बारिश में अमरो देवी का शव लेकर भेवड गांव के शमशान घाट में आ गए। वहाँ मौका पर जाट समाज से 7-8 लोग आ गये जिनमे मुख्य रूप से बर्फी व विक्रम सिंह थे उन्होंने गुस्से कहा की आप हरिजन लोग यहाँ शव नहीं जला सकते आप जाके खड्ड में ही जलाओ। आप हरिजन लोग खड्ड में ही जलाते है वहीँ पर जलाओ इसके साथ ही वे जाट लोग सब गाली गलोच पर उतारू हो गए।
मौका पर प्यार चन्द व उसके परिवार ने थाना बडसर से SHO को बुलाया लेकिन बर्फी व विक्रम सिंह के साथ साथ अन्य जाट समुदाय के लोग SHO पर दबाव बनाने लगे कि शव यहाँ पर नहीं जलेगा। फिर प्यार चन्द के परिवार ने SDM बडसर को फोन करा तो उन्होंने मौका पर तहसीलदार को भेजा फिर तहसीलदार ने जबरन 3 घंटे की मशक्त के बात अमरो देवी का शव जलवाया।
यह घटना जिला ऊना की नगर परिषद संतोषगढ़ की है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां चेतना (काल्पनिक नाम), उम्र 15 वर्ष, कक्षा 11वीं की छात्रा, दलित समाज (चमार जाति) से संबंधित, अपने परिवार के साथ रहती है। उसके पिता मजदूरी करते हैं।
दिनांक 27-06-25 को, जब चेतना अपनी सहेली के घर से लौट रही थी और परशुराम चौक के पास पहुँची, तो वहां एक युवक शराब पीकर अपनी गाड़ी लेकर खड़ा था। उसने चेतना को जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया और किसी सुनसान ईंट-भट्टे पर ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की तथा उसकी फोटो भी खींच ली।
बाद में, दिनांक 30-07-25 को जब चेतना स्कूल जा रही थी, तब उसी युवक ने गाड़ी (नंबर HP35-2112) में उसका पीछा किया और फोटो दिखाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा। उसने कई बार उसे रोका और अपने साथ बैठने के लिए दबाव बनाया। चेतना ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया और स्कूल जाकर अपने अध्यापकों को सारी घटना बता दी।
इस शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ थाना पुलिस में मामला दर्ज किया गया, जो कि धारा 126(2), 127(2), 74, 75(2), 78(2) BNS एवं धारा 8, 12 POCSO Act के अंतर्गत पंजीकृत हुआ।
यह घटना जिला ऊना, तहसील हरोली, गाँव बाथू की है, जहाँ दलित समाज से सम्बन्धित निशा देवी पुत्री सुरजीत सिंह रहती हैं। लगभग 7 वर्ष पूर्व उनकी शादी सुभाष चंद निवासी बहली मोहल्ला, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश के साथ हुई थी, परंतु पति एवं ससुराल पक्ष से मारपीट और उत्पीड़न के कारण वह पिछले 2 वर्षों से मायके में ही रह रही हैं।दिनांक 04-03-2024 से 30-04-2025 तक निशा देवी ने गाँव अमराली, तहसील हरोली स्थित Zeera Foods Pvt. Ltd. फैक्ट्री में पैकिंग वर्कर के रूप में कार्य किया। वह इस फैक्ट्री में ठेकेदार रमन राणा के माध्यम से कार्यरत थीं। अक्तूबर 2024 में जब सभी मजदूरों को दिवाली बोनस दिया गया, तो ठेकेदार ने बाद में मजदूरी में कटौती की, जो कि नियमविरुद्ध था। इस पर निशा देवी ने आपत्ति जताई, जिससे ठेकेदार का व्यवहार उनके प्रति शत्रुतापूर्ण हो गया और वह लगातार बहाने बनाकर उन्हें प्रताड़ित करने लगा।
मार्च 2025 में बीमारी के कारण निशा देवी ने ESI कार्ड के माध्यम से उपचार लिया और 25 मार्च को फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त किया। इसके बावजूद ठेकेदार ने उन्हें 4 अप्रैल तक काम पर नहीं आने दिया। 4 अप्रैल को ही दबाव डालकर उनसे बिना तारीख वाला इस्तीफा लिखवाया तथा बाद में उन्हें दोबारा काम पर रखा।दिनांक 26-04-2025 से 30-04-2025 तक वह अपने भाई की शादी के कारण अवकाश पर रहीं। 30 अप्रैल को ठेकेदार ने उन्हें फोन कर कहा कि GM के बुलाने पर ही काम पर आएं। इसके उपरांत 03-05-2025 को उन्हें नौकरी से निकाले जाने की सूचना दी गई। निशा देवी ने इस पर लेबर इंस्पेक्टर के पास शिकायत दर्ज की। 06-05-2025 को ठेकेदार ने पुनः नौकरी पर रखने का आश्वासन दिया, परंतु बाद में मना कर दिया।03-05-2025 को ही लेबर इंस्पेक्टर द्वारा दोनों पक्षों को काउंसलिंग हेतु ऊना लेबर कोर्ट बुलाया गया। काउंसलिंग के उपरांत जब निशा देवी अपने सहकर्मी रजत शर्मा के साथ कोर्ट परिसर से बाहर आईं, तो ठेकेदार रमन राणा अपने एक साथी के साथ वहाँ पहुंचा और बिना कारण विवाद करने लगा।
इस दौरान उसने जातिसूचक गालियाँ दीं और धमकी देते हुए कहा –
"सालो चमारो, तुम लोग चमार ही रहोगे। मैंने आज तक चमारों को अपनी जूती के नीचे रखा है, तुम क्या चीज हो। तुम्हें अब औकात दिखाऊँगा।"
निशा देवी ने इस संबंध में थाना टाहलीवाल में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। जब उन्होंने DSP हरोली मोहन रावत से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि “इसमें कोई कार्यवाही नहीं बनती, आप लोगों से तो बात करने से भी डर लगता है।”
इसके बाद निशा देवी ने जिला ऊना में ASP श्री सुरेंद्र शर्मा को शिकायत पत्र प्रस्तुत किया और दोषी रमन राणा के विरुद्ध SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत मामला 23-06-2025 को दर्ज करवाया।
यह घटना तहसील बंगाणा के गांव सतरुखा की है। इस गांव में नानक चन्द, पुत्र स्वर्गीय सिख राम उर्फ माडू राम, निवास करता है। उसकी आयु लगभग 64 वर्ष है और वह चमार जाति से सम्बन्धित है। नानक चन्द MSME/AD विभाग से सेवा-निवृत्त कर्मचारी है।
नानक चन्द को किसी व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से यह जानकारी मिली कि बंगाणा से सटे गांव नायली में पंडित प्रकाश चन्द शर्मा, पुत्र स्वर्गीय उधो राम, जो लगभग 70 वर्ष के हैं और एक समाज सेवक हैं, ने अपनी साझा (मुस्तरका) भूमि पर एक मंदिर का निर्माण किया है। इस मंदिर में उन्होंने बाबा पहाड़िया, सुभाष चन्द्र बोस, अपने माता-पिता तथा श्री गुरु रविदास महाराज जी की प्रतिमाएं स्थापित की हैं।
श्री गुरु रविदास जी की प्रतिमा स्थापित होने के एक माह पश्चात् दिनांक 12.04.2025 को पंडित प्रकाश चन्द शर्मा ने एक भंडारे का आयोजन किया और आसपास के गांवों में विशेष रूप से दलित समाज को आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने नानक चन्द को यह बताया कि जब से उन्होंने श्री गुरु रविदास महाराज जी की प्रतिमा स्थापित की है, तब से उनके मोहल्ले के कुछ शरारती तत्व विरोध करने लगे हैं और कह रहे हैं कि वे “एक चमार की मूर्ति को माथा नहीं टेकेंगे।” पंडित प्रकाश ने नानक चन्द को यह भी स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर प्रतिमा स्थापित की गई है, वह भूमि उनके हिस्से की है।
भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो, इस आशय से दिनांक 08.04.2025 को पंडित प्रकाश चन्द ने जिला उपायुक्त ऊना को एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् 10.04.2025 को स्थानीय समाचार पत्र में यह प्रकाशित हुआ कि पंडित प्रकाश चन्द के ही गांव के कुछ लोगों ने जिला उपायुक्त से मिलकर उक्त भूमि को लेकर अदालत में दावा दायर कर दिया है।
इसके बाद 11.04.2025 को एसडीएम बंगाणा के निर्देश पर तहसीलदार अमित शर्मा ने पंडित प्रकाश चन्द को दूरभाष पर सूचित किया कि वे उसी शाम उस स्थल पर आएंगे ताकि प्रार्थना पत्र के विषय में बातचीत की जा सके। पंडित प्रकाश चन्द के मोहल्ले में जहाँ मात्र 23 ब्राह्मण परिवार रहते हैं, उस शाम वहाँ लगभग तीन सौ लोग एकत्रित हो गए, जिनमें बाहरी गांवों से आए राजपूत जाति के लोग भी शामिल थे।
नानक चन्द अपने बेटों और समाज के अन्य लोगों सहित इस सभा में उपस्थित हुआ। बातचीत के दौरान मनोज शर्मा फेसबुक पर लाइव वीडियो प्रसारित कर रहा था और कई लोग भड़काऊ भाषण दे रहे थे। सभा में नानक चन्द और उसके साथियों को “दूसरी जाति,” “नीच जाति,” तथा “बाहरी लोग” कहकर अपमानित किया गया। इस दौरान मनोज शर्मा और रणवीर राणा सहित अन्य लोगों ने नानक चन्द की गाड़ी तोड़ने तथा उसे जान से मारने की धमकियाँ भी दीं। स्थिति तनावपूर्ण होने पर तहसीलदार ने आदेश पारित किया कि गुरु रविदास जी की प्रतिमा को वहां से हटाकर पंडित प्रकाश चन्द के घर के बरामदे में रख दिया जाए। इसके उपरान्त पुलिस ने नानक चन्द और उसके साथियों को वहाँ से बाहर निकाला।