
SMS Help line to Address Violence Against Dalits and Adivasis in India
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यह घटना तहसील बंगाणा के गांव बसातर की है। इस गांव में दिनाक 29 दिसम्बर को तहसील बंगाणा में पड़ते गांव बसातर में कबीर पंथी समाज में से वीरबल सिंह की मौत हो गई जिसकी उम्र करीब 71 वर्ष की थी. गांव बसातर में सरकारी ज़मीन पर सरकार द्वारा सार्वजनिक तौर पर एक शमशान घाट बनाया गया है. लेकिन वीरबल सिंह के शव को शमशान घाट पर ले जाने से पहले ही लकड़ियों की चिता को शमशान घाट के बाहर ही बना दिया गया जब कुछ लोगो द्वारा चिता को शमशान घाट के अन्दर बनी शैड में लगाने को कहा गया तो अपशगुन का बहाना लगा कर चिता को बाहर ही लगाया गया और शव को बाहर ही जला दिया गया इससे पहले भी दलित परिवार से प्रकाश चन्द के शव को बरसात में शमशान घाट के बाहर ही जलाया गया जबकि गैर दलित समाज के शवों को शमशान घाट के शैड में ही जलाया जाता है. गांव बसातर का यह शमशान घाट सार्वजनिक तौर पर है और सरकार की ज़मीन पर सरकारी पैसे से बना हुआ है। शासन प्रसाशन इस घटना पर कडा संज्ञान ले. इतना ही नहीं पंचायत द्वारा पीड़ित परिवार की ज़मीन बिना किसी अनुमति जबरन रोड बना दिया है और रोड का सारा पानी पीड़ित के मकान के पीछे छोड़ दिया गया है जिस कारण पीड़ित का सारा मकान बैठ गया है.
यह घटना तहसील बंगाणा के गांव कोलका (रायेपुर मैदान) की है। इस गांव में यह अत्यंत दुखद और जघन्य घटना हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की सैंज घाटी की है, जहाँ एक दलित महिला युवावंती, जो समाज में स्वावलंबन की मिसाल पेश करते हुए अपने घर से लगभग दो-तीन किलोमीटर दूर दयोली गांव में अपना एक सिलाई केंद्र (Boutique) चलाती थीं, इस क्रूरता का शिकार हुईं। युवावंती रोज की तरह अपने सिलाई केंद्र पर काम खत्म करने के बाद शाम को पैदल ही जंगल के रास्ते से अपने घर लौट रही थीं, लेकिन उस दिन वह घर नहीं पहुँचीं। उनके पति रतिराम, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जब उनकी राह तकते-तकते थक गए और चिंता बढ़ी, तो उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर उस रास्ते पर खोजबीन शुरू की जहाँ से वह रोज गुजरती थीं। काफी तलाश के बाद जंगल के एकांत क्षेत्र में युवावंती का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला, जिसे देख पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। दरअसल, अपराधियों ने घात लगाकर उन्हें रास्ते में रोका, उनके साथ सामूहिक बलात्कार जैसी हैवानियत को अंजाम दिया और फिर उनकी नृशंस हत्या कर दी; साक्ष्य मिटाने और मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उनके शव को पेड़ से टांग दिया गया था। रतिराम के अनुसार, उनकी पत्नी एक मेहनती महिला थीं जो अपने सिलाई के काम से परिवार की मदद कर रही थीं, लेकिन अपराधियों ने उनके इस संघर्षपूर्ण जीवन का अंत कर दिया। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान पवन कुमार और संजय कुमार जैसे स्थानीय व्यक्तियों के नाम मुख्य दोषियों के रूप में सामने आए, जिन्हें बाद में गिरफ्तार भी किया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया क्योंकि शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया था। रतिराम जैसे एक साधारण मजदूर के लिए अपनी पत्नी के साथ हुई इस भयानक घटना की पूरी जानकारी दे पाना मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक है, क्योंकि इस रास्ते पर गुजरते हुए आज भी उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आता होगा। वर्तमान में यह मामला दलित उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक गंभीर उदाहरण बन चुका है, जिसमें उचित कानूनी पैरवी और रतिराम को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
यह घटना जिला ऊना की पंचायत मजारा की है यह गांव जिला मुख्यालय से 20 कि०मी० दुरी पर है. इसी गांव में लितिका पत्नी श्री संजीव कुमार रहती है. उसकी उम्र 33 वर्ष की है. उसकी एक बेटी और एक बेटा है, वह अनुसूचित जाति में से जुलाहा जाति से सम्बन्धित है, वह निम्न पते की स्थाई निवासी है गांव मजारा डाकघर सनोली तहसील व जिला ऊना हि०प्र०.
दिनाक 14 फरवरी 2011 को लितिका देवी की शादी संजीव कुमार स्पुत्र कश्मीरी लाल जाति ब्राहमण गांव मजारा डाकघर सनोली तहसील व जिला ऊना हि०प्र०. से हुई है उसके पति चंडीगढ में मैस (कैंटीन) चलाते है. लितिका का पति संजीव कुमार पहले शादी शुदा था और उसकी पहली शादी से एक बेटी है लितिका के पति की पहली पत्नी के साथ तलाक हुआ है उसके बाद ही उसने लितिका के साथ शादी करी है. शादी के बाद से ही लितिका उसका पति, बेटी और बेटा सब पूरा परिवार चंडीगढ़ में ही रहते है.
गांव मजारा में लितिका देवी के पति की पैत्रिक ज़मीन है जिसमे उसके पति ने सन 2011-12 में अपना खुद का रहने लाइक मकान बनाया है, लितिका देवी के पति का बड़ा भाई जिसका नाम विजय कुमार है वह अपने परिवार सहित लितिका के पति के पैत्रिक बने बनाये मकान में रह रहा है लितिका की सास इनके साथ चंडीगढ़ में ही रहती थी और उसकी सास का चंडीगढ़ PGI से इलाज़ हुआ उन्होंने उनकी पूरी सेवा की और चंडीगढ़ में ही उनका स्वर्गवास हुआ और चंडीगढ़ में ही उनका अंतिम संस्कार और रस्म पगड़ी किया. लितिका देवी की शादी के बाद बच्चों को छुट्टियां होने पर वे सब अपने मकान मजारा में आते व कई कई दिन रह कर जाते थे उस दोरान लितिका के ससुराल मजारा में जेठ व् इसके पुरे परिवार व अन्य किसी को भी लितिका देवी की जाति के बारे में पता नहीं था.
पिछले वर्ष दिसम्बर महीने में कहीं ना कहीं से लितिका के जेठ व उसके परिवार को पता चल गया की लितिका जुलाहा जाति से सम्बन्धित है. 30 दिसम्बर 2022 को लितिका देवी अपने बच्चों को स्कूल से छुट्टियाँ होने कारण अपने पति व् बच्चों सहित गांव मजारा में आई शाम करीब 5 बजे जैसे ही वे सब अपने घर पहुंचे तो इन्होने देखा की उनके मुख्य गेट पर व् सभी कमरों पर नये ताले लगे हुए हैं जब लितिका और उसके पति ने उन तालों को तोड़ा तो अन्दर देखा की बरामदे में पशुयों का सुखा चारा भरा पडा है. इतने में उसका जेठ व उसका पूरा परिवार जिसमे उसका जेठ विजय कुमार, जेठानी रीना कुमारी, उनकी बेटी पलक, व् लितिका का चाचा ससुर राम कुमार आये व लितिका व् उसके पति के साथ मारपीट करने लग गए और कहने लगे की इस कुत्ती चुहड़ी, साली जुलाही को घर से निकालो लितिका के पति को बोले ये कुत्ता कहाँ से इस गंद को शादी करके ले आया है. लितिका की जान से मारने की धमकी दी और कहा तेरे जैसे तो हमारे घरों में नौकर भी नहीं होते जुलाही गंद किस्से थां दी इसके उपरांत लितिका के परिवार पर पुलिस चौकी संतोषगढ़ से उसके जेठ ने पुलिस वालो को बुला लिया जिन्होंने झगड़ा ख़तम किया ओर चले गए. इसके बाद लितिका देवी द्वारा NDMJ टीम से संपर्क किया व् 13 जनवरी 2023 को टीम के सहयोग से दोषी गण के खिलाफ थाना में अनुसूचित जाति धारा सहित मामला दर्ज करवायाथा लेकिन दिनांक 10.07.24 को फिर लितिका अपने परिवार के साथ चण्डीगढ़ से आपने घर गांव मजारा आई तो घर का विजय कुमार व राम कुमार ने तालातोड़कर घर में पशु चारा लकड़ी कवाड इत्यादी रखकर घर के सारे हिस्सा में भी कब्जा कर लिया था जो सरा सर गल्त है. लितिका के साथ यह सब अनुसूचित जाति की होने की वजह से किया जा रहा है। इस घटना वावत भी थाना ऊना में दोषी गण के खिलाफ अनुसूचित जाति जन जाति अधिनियम धारा सहित मामला दर्ज करवाया है.
A group of approximately 150 heavily armed individuals attempted to mob-lynch a Dalit teacher.
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The incident took place in the state of Bihar, within the Dhaka Police Station area of East Champaran district, at the Government Middle School, Bisarahiyan. The victim, Mr. Umesh Baitha (son of Mr. Baldeo Baitha), is a resident of Village Pipra Bazid (P.O. + P.S. Dhaka, Dist. East Champaran) and serves as the Headmaster of the aforementioned school. Mr. Baitha is a member of a Scheduled Caste.
The prime accused, Mohammad Akhtar, is a resident of Bisarahinya village and is the husband of the Ward Councilor for Ward No. 08. Mohammad Akhtar is an individual of criminal disposition.On March 25, 2026, Mohammad Akhtar arrived at the school premises accompanied by a mob of 100 to 150 people and launched a life-threatening assault on Shri Baitha while hurling caste-based slurs. When his son, Satish Chandra, intervened to mediate, the attackers struck him with an iron rod, breaking a bone in his arm. Both individuals were left critically injured.
The prime accused, Mohammad Akhtar, is a resident of Bisarahinya village and is the husband of the Ward Councilor for Ward No. 08. Mohammad Akhtar is an individual of criminal disposition.On March 25, 2026, Mohammad Akhtar arrived at the school premises accompanied by a mob of 100 to 150 people and launched a life-threatening assault on Shri Baitha while hurling caste-based slurs. When his son, Satish Chandra, intervened to mediate, the attackers struck him with an iron rod, breaking a bone in his arm. Both individuals were left critically injured.